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शान्ति पर्व
अध्याय २४
व्यास उवाच
एवमुक्तः स विप्रर्षिः सुद्युम्नमिदमव्रवीत् |
१४ क
आदि पर्व
अध्याय १७२
गन्धर्व उवाच
एवमुक्तः स विप्रर्षिर्वसिष्ठेन महात्मना |
१ क
वन पर्व
अध्याय २०२
मार्कण्डेय़ उवाच
एवमुक्तः स विप्रस्तु धर्मव्याधेन भारत |
१ क
मौसल पर्व
अध्याय ८
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तः स वीभत्सुर्मातुलेन परन्तपः |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३०७
भीष्म उवाच
एवमुक्तः स वैदेहं प्रत्युवाच परोक्षवित् |
६ क
विराट पर्व
अध्याय ४८
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तः स वैराटिर्हय़ान्संय़म्य यत्नतः |
१३ क
वन पर्व
अध्याय ५२
वृहदश्व उवाच
एवमुक्तः स शक्रेण नलः प्राञ्जलिरव्रवीत् |
७ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय २०
वासुदेव उवाच
एवमुक्तः स शान्तात्मा तामुवाच हसन्निव |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय १६२
भीष्म उवाच
एवमुक्तः स सुहृदा तदा तेन हितैषिणा |
४७ क
विराट पर्व
अध्याय ३४
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तः स सैरन्ध्र्या भगिनीं प्रत्यभाषत |
१८ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तः सञ्जय़ेन धृतराष्ट्रो महामनाः |
१९ क
द्रोण पर्व
अध्याय ६३
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्तः समाश्वस्तः सिन्धुराजो जय़द्रथः |
१६ क
आदि पर्व
अध्याय १२३
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तः सव्यसाची मण्डलीकृतकार्मुकः |
६० क
शान्ति पर्व
अध्याय २२०
भीष्म उवाच
एवमुक्तः सहस्राक्षो भगवान्पाकशासनः |
८८ क
उद्योग पर्व
अध्याय ११३
नारद उवाच
एवमुक्तः सुपर्णेन तथ्यं वचनमुत्तमम् |
१ क
द्रोण पर्व
अध्याय १२३
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्तः स्मय़न्कृष्णः शनकैर्वाहय़न्हय़ान् |
३० क
वन पर्व
अध्याय १२४
लोमश उवाच
एवमुक्तः स्मय़न्निन्द्रमभिवीक्ष्य स भार्गवः |
१६ क
आदि पर्व
अध्याय ५७
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तवतीं तां तु प्रीतिमानृषिसत्तमः |
६३ क
आदि पर्व
अध्याय १२७
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तस्ततः कर्णः किञ्चित्प्रस्फुरिताधरः |
८ क
आदि पर्व
अध्याय १२६
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तस्ततः कर्णस्तथेति प्रत्यभाषत |
३९ क
वन पर्व
अध्याय २४१
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तस्ततः कर्णो राजानमिदमव्रवीत् |
२० क
सभा पर्व
अध्याय १९
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तस्ततः कृष्णः प्रत्युवाच महामनाः |
४४ क
सभा पर्व
अध्याय २२
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तस्ततः कृष्णः प्रत्युवाच वृकोदरम् |
३ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय १६
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तस्ततः कृष्णः फल्गुनं प्रत्यभाषत |
८ क
वन पर्व
अध्याय १०२
लोमश उवाच
एवमुक्तस्ततः क्रोधात्प्रवृद्धः सहसाचलः |
५ क
शल्य पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तस्ततः क्षत्ता ताः स्त्रिय़ो भरतर्षभ |
४९ क
शान्ति पर्व
अध्याय १४२
भीष्म उवाच
एवमुक्तस्ततः पक्षी पर्णान्यास्तीर्य भूतले |
२९ क
द्रोण पर्व
अध्याय २८
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्तस्ततः पार्थः केशवेन महात्मना |
३६ क
शान्ति पर्व
अध्याय १५१
भीष्म उवाच
एवमुक्तस्ततः प्राह शल्मलिः प्रहसन्निव |
१० क
शल्य पर्व
अध्याय ९
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्तस्ततः प्राय़ान्मद्रराजस्य सारथिः |
४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १४
उपमन्युरु उवाच
एवमुक्तस्ततः शर्वः सुरैर्व्रह्मादिभिस्तथा |
१७४ क
वन पर्व
अध्याय १०२
लोमश उवाच
एवमुक्तस्ततः सूर्यः शैलेन्द्रं प्रत्यभाषत |
४ क
भीष्म पर्व
अध्याय ६५
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्तस्ततो द्रोणस्तव पुत्रेण मारिष |
२० क
द्रोण पर्व
अध्याय १६५
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्तस्ततो द्रोणो भीमेनोत्सृज्य तद्धनुः |
३३ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय ४
कृप उवाच
एवमुक्तस्ततो द्रौणिर्मातुलेन हितं वचः |
२० क
उद्योग पर्व
अध्याय १२६
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तस्ततो धर्मो निय़ोगात्परमेष्ठिनः |
४५ क
वन पर्व
अध्याय १५४
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तस्ततो भीमः सृक्किणी परिसंलिहन् |
४० क
वन पर्व
अध्याय २९६
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तस्ततो भीमो यक्षेणामिततेजसा |
३८ क
भीष्म पर्व
अध्याय ४८
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्तस्ततो राजन्पिता देवव्रतस्तव |
३७ ख
शल्य पर्व
अध्याय ४
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्तस्ततो राजा गौतमेन यशस्विना |
१ क
शल्य पर्व
अध्याय ६
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्तस्ततो राजा मद्राधिपतिमञ्जसा |
५ क
शल्य पर्व
अध्याय १७
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्तस्ततो राजा वलेन महता वृतः |
२५ क
आदि पर्व
अध्याय ५१
सूत उवाच
एवमुक्तस्ततो राजा व्रह्मन्पारिक्षितस्तदा |
१८ क
विराट पर्व
अध्याय ४
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तस्ततो राज्ञा धौम्योऽथ द्विजसत्तमः |
४७ क
आदि पर्व
अध्याय १०१
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तस्ततो राज्ञा प्रसादमकरोन्मुनिः |
१९ क
वन पर्व
अध्याय ५०
वृहदश्व उवाच
एवमुक्तस्ततो हंसमुत्ससर्ज महीपतिः |
२१ क
आदि पर्व
अध्याय १६७
गन्धर्व उवाच
एवमुक्तस्ततो हृष्टो वसिष्ठः श्रेष्ठभागृषिः |
१५ क
द्रोण पर्व
अध्याय १०८
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्तस्तथेत्युक्त्वा तव पुत्रस्तवात्मजम् |
३६ क
सभा पर्व
अध्याय ६९
वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तस्तथेत्युक्त्वा पाण्डवः सत्यविक्रमः |
२१ क
कर्ण पर्व
अध्याय १५
सञ्जय़ उवाच
एवमुक्तस्तथेत्युक्त्वा प्रहरेति च ताडितः |
१९ क