शान्ति पर्व
अध्याय
१९६
मनुरु उवाच
एवमस्ति न वेत्येतन्न च तन्न पराय़णम् ||
८ ख
आदि पर्व
अध्याय
४
सूत उवाच
एवमस्तु गुरौ तस्मिन्नुपविष्टे महात्मनि |
८ क
वन पर्व
अध्याय
२१९
स्कन्द उवाच
एवमस्तु नमस्तेऽस्तु पुत्रस्नेहात्प्रशाधि माम् |
१३ क
वन पर्व
अध्याय
२८७
वैशम्पाय़न उवाच
एवमस्तु परं चेति पुनश्चैनमथाव्रवीत् ||
९ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५६
उत्तङ्क उवाच
एवमस्तु महाराज समय़ः क्रिय़तां तु मे |
६ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१८१
भीष्म उवाच
एवमस्त्राणि दिव्यानि रामस्याहमवारय़म् |
१३ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३८
कुन्त्यु उवाच
एवमस्त्विति च प्राह पुनरेव स मां द्विजः ||
५ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
७
मरुत्त उवाच
एवमस्त्विति चाप्युक्तो भ्रात्रा ते वलवृत्रहा ||
१५ ख
वन पर्व
अध्याय
२२०
मार्कण्डेय़ उवाच
एवमस्त्विति चाप्युक्त्वा महासेनो महेश्वरम् |
१३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
११३
भीष्म उवाच
एवमस्त्विति चोक्तः स वरदेन महात्मना |
७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२
स्त्र्यु उवाच
एवमस्त्विति चोक्त्वा तामापृच्छ्य त्रिदिवं गतः |
४९ क
आदि पर्व
अध्याय
२७
सूत उवाच
एवमस्त्विति तं चापि प्रत्यूचुः सत्यवादिनः |
१७ क
आदि पर्व
अध्याय
१४
सूत उवाच
एवमस्त्विति तं चाह कश्यपं विनता तदा ||
९ ख
आदि पर्व
अध्याय
३४
एलापत्र उवाच
एवमस्त्विति तं देवाः पितामहमथाव्रुवन् |
१६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१२४
धृतराष्ट्र उवाच
एवमस्त्विति तं प्राह प्रह्रादो विस्मितस्तदा |
४३ क
आदि पर्व
अध्याय
१५२
वैशम्पाय़न उवाच
एवमस्त्विति तं प्राहुर्जगृहुः समय़ं च तम् ||
४ ख
वन पर्व
अध्याय
२५६
भीमसेन उवाच
एवमस्त्विति तं राजा कृच्छ्रप्राणो जय़द्रथः |
१२ क
आदि पर्व
अध्याय
७
सूत उवाच
एवमस्त्विति तं वह्निः प्रत्युवाच पितामहम् |
२३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
११९
सञ्जय़ उवाच
एवमस्त्विति तत्रोक्त्वा स देवोऽन्तरधीय़त ||
१८ ख
आदि पर्व
अध्याय
४९
सूत उवाच
एवमस्त्विति तद्वाक्यं प्रोवाचानुमुमोद च ||
८ ख
आदि पर्व
अध्याय
४४
सूत उवाच
एवमस्त्विति तद्वाक्यं भगिन्याः प्रत्यगृह्णत ||
१४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१६
कृष्ण उवाच
एवमस्त्विति तद्वाक्यं मय़ोक्तः प्राह शङ्करः |
४ क
शल्य पर्व
अध्याय
४७
वैशम्पाय़न उवाच
एवमस्त्विति तां चोक्त्वा हरो यातस्तदा दिवम् ||
४५ ग
आदि पर्व
अध्याय
६७
वैशम्पाय़न उवाच
एवमस्त्विति तां राजा प्रत्युवाचाविचारय़न् |
१८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१६६
भीष्म उवाच
एवमस्त्विति तानाह राक्षसेन्द्रो निशाचरान् |
२१ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२४
दुर्योधन उवाच
एवमस्त्विति तान्देवः प्रत्युक्त्वा प्राविशद्दिवम् ||
१२ ग
शल्य पर्व
अध्याय
४६
वैशम्पाय़न उवाच
एवमस्त्विति तान्देवान्वरुणो वाक्यमव्रवीत् ||
८ ख
वन पर्व
अध्याय
१८२
वैशम्पाय़न उवाच
एवमस्त्विति ते सर्वे प्रतिपूज्य महामुनिम् |
२१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
११२
भीष्म उवाच
एवमस्त्विति तेनासौ मृगेन्द्रेणाभिपूजितः |
३९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
८३
वसिष्ठ उवाच
एवमस्त्विति देवांस्तान्विप्रर्षे प्रत्यभाषत ||
४६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
४१
सञ्जय़ उवाच
एवमस्त्विति देवेशमुक्त्वावुध्यत पार्थिवः ||
१७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
५६
भीष्म उवाच
एवमस्त्विति धर्मात्मा तदा भरतसत्तम ||
१५ ग
कर्ण पर्व
अध्याय
२६
सञ्जय़ उवाच
एवमस्त्विति मद्रेश उक्त्वा नोत्तरमुक्तवान् |
७२ क
वन पर्व
अध्याय
१०८
लोमश उवाच
एवमस्त्विति राजानं भगवान्प्रत्यभाषत ||
१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१५१
सञ्जय़ उवाच
एवमस्त्विति राजानमुक्त्वा राक्षसपुङ्गवः |
१२ क
वन पर्व
अध्याय
२९१
वैशम्पाय़न उवाच
एवमस्त्विति राजेन्द्र प्रस्थितं भूरिवर्चसम् ||
२६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
५९
भीष्म उवाच
एवमस्त्विति वैन्यस्तु तैरुक्तो व्रह्मवादिभिः |
११६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०३
भृगुरु उवाच
एवमस्त्विति संहृष्टाः प्रत्यूचुस्ते पितामहम् ||
३३ ख
वन पर्व
अध्याय
११५
भृगुरु उवाच
एवमस्त्विति सा तेन पाण्डव प्रतिनन्दिता |
२८ क
वन पर्व
अध्याय
२८०
मार्कण्डेय़ उवाच
एवमस्त्विति सावित्री ध्यानय़ोगपराय़णा |
१३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
४
भीष्म उवाच
एवमस्त्विति होवाच स्वां भार्यां सुमहातपाः |
४५ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१५
शल्य उवाच
एवमस्त्वित्यथोक्त्वा तु जगाम नहुषं प्रति ||
५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२४
देवा ऊचुः
एवमस्मासु हि पुरा भगवन्नुक्तवानसि |
१०१ क
सभा पर्व
अध्याय
६१
भीमसेन उवाच
एवमस्मिकृतं विद्यां यद्यस्याहं धनञ्जय़ |
१० क
शान्ति पर्व
अध्याय
७४
कश्यप उवाच
एवमस्मिन्वर्तते लोक एव; नामुत्रैवं वर्तते राजपुत्र |
२५ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
एवमस्य धनूंष्याजौ चिच्छेद सुवहून्यपि |
४९ क
स्त्री पर्व
अध्याय
२४
गान्धार्यु उवाच
एवमस्यापि दुर्वुद्धेर्लोकाः शस्त्रेण वै जिताः ||
२७ ख
सभा पर्व
अध्याय
७१
विदुर उवाच
एवमाकारलिङ्गैस्ते व्यवसाय़ं मनोगतम् |
२४ क
शल्य पर्व
अध्याय
४२
वैशम्पाय़न उवाच
एवमाकुलतां यातः श्रुत्वा पास्यामहे वय़म् ||
९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
८३
भीष्म उवाच
एवमाख्याति काकोऽय़ं तच्छीघ्रमनुगम्यताम् ||
१३ ख