आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३६
वैशम्पाय़न उवाच
इमे च देवगन्धर्वाः सर्वे चैव महर्षय़ः |
२० क
वन पर्व
अध्याय
९७
लोमश उवाच
इमे च नातिधनिनो धनार्थश्च महान्मम |
१० क
आदि पर्व
अध्याय
२२१
वैशम्पाय़न उवाच
इमे च मां कर्षय़न्ति शिशवो मन्दचेतसः |
४ क
आदि पर्व
अध्याय
५९
वैशम्पाय़न उवाच
इमे च वंशे प्रथिताः सत्त्ववन्तो महावलाः |
२७ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१
कृष्ण उवाच
इमे च सत्येऽभिरताः सदैव; तं पारय़ित्वा समय़ं यथावत् |
२० क
शान्ति पर्व
अध्याय
१२४
युधिष्ठिर उवाच
इमे जना नरश्रेष्ठ प्रशंसन्ति सदा भुवि |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३३६
वैशम्पाय़न उवाच
इमे तथा ज्ञानमहाजलौघा; नाराय़णं वै पुनराविशन्ति ||
७७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
९०
भीष्म उवाच
इमे तु भरतश्रेष्ठ विज्ञेय़ाः पङ्क्तिपावनाः |
१८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२९
महेश्वर उवाच
इमे तु लोकधर्मार्थं त्रय़ः सृष्टाः स्वय़म्भुवा |
४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१४
वैशम्पाय़न उवाच
इमे ते भ्रातरः पार्थ शुष्यन्त स्तोकका इव |
६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
५०
सञ्जय़ उवाच
इमे ते भ्रातरः सर्वे दीना भरतसत्तम |
६८ क
वन पर्व
अध्याय
२९७
यक्ष उवाच
इमे ते भ्रातरो राजन्वार्यमाणा मय़ासकृत् |
२२ क
वन पर्व
अध्याय
२१९
मार्कण्डेय़ उवाच
इमे त्वष्टादशान्ये वै ग्रहा मांसमधुप्रिय़ाः |
३५ क
उद्योग पर्व
अध्याय
११९
नारद उवाच
इमे त्वां तारय़िष्यन्ति दिष्टमेतत्पुरातनम् ||
२३ ग
आदि पर्व
अध्याय
११७
वैशम्पाय़न उवाच
इमे तय़ोः शरीरे द्वे सुताश्चेमे तय़ोर्वराः |
३० क
अनुशासन पर्व
अध्याय
८५
अग्निरु उवाच
इमे नः सन्तरिष्यन्ति प्रजाभिर्जगदीश्वराः ||
४६ ख
सभा पर्व
अध्याय
५४
युधिष्ठिर उवाच
इमे निष्कसहस्रस्य कुण्डिनो भरिताः शतम् |
२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
९०
भीष्म उवाच
इमे परे महाराज विज्ञेय़ाः पङ्क्तिपावनाः |
२५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१००
भीष्म उवाच
इमे पलाय़मानानां नरकाः प्रत्युपस्थिताः |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३९
वैशम्पाय़न उवाच
इमे प्राहुर्द्विजाः सर्वे समारोप्य वचो मय़ि |
२६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३३
उमो उवाच
इमे मनुष्या दृश्यन्ते ऊहापोहविशारदाः |
४३ क
आदि पर्व
अध्याय
९७
वैशम्पाय़न उवाच
इमे महिष्यौ भ्रातुस्ते काशिराजसुते शुभे |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१७३
भीष्म उवाच
इमे मां कृमय़ोऽदन्ति तेषामुद्धरणाय़ मे |
१९ क
आदि पर्व
अध्याय
२२३
द्रोण उवाच
इमे मार्जारकाः शुक्र नित्यमुद्वेजय़न्ति नः |
२४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२४८
युधिष्ठिर उवाच
इमे मृता नृपतय़ः प्राय़शो भीमविक्रमाः |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२७७
भीष्म उवाच
इमे मय़ा विनाभूता भविष्यन्ति कथं त्विति ||
१५ ख
आदि पर्व
अध्याय
१८६
दूत उवाच
इमे रथाः काञ्चनपद्मचित्राः; सदश्वय़ुक्ता वसुधाधिपार्हाः |
२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
११७
युधिष्ठिर उवाच
इमे वै मानवा लोके भृशं मांसस्य गृद्धिनः |
१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
३९
युधिष्ठिर उवाच
इमे वै मानवा लोके स्त्रीषु सज्जन्त्यभीक्ष्णशः |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२५१
युधिष्ठिर उवाच
इमे वै मानवाः सर्वे धर्मं प्रति विशङ्किताः |
१ क
आदि पर्व
अध्याय
१११
वैशम्पाय़न उवाच
इमे वै वन्धुदाय़ादाः षट्पुत्रा धर्मदर्शने |
२७ क
वन पर्व
अध्याय
१८०
वैशम्पाय़न उवाच
इमे वय़ं निग्रहणे कुरूणां; यदि प्रतिज्ञा भवतः समाप्ता ||
२१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१९५
मनुरु उवाच
इमे शरीरैर्जलमेव गत्वा; जलाच्च तेजः पवनोऽन्तरिक्षम् |
२ क
सभा पर्व
अध्याय
६०
दुर्योधन उवाच
इमे सभाय़ामुपदिष्टशास्त्राः; क्रिय़ावन्तः सर्व एवेन्द्रकल्पाः |
२९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३२७
जनमेजय़ उवाच
इमे सव्रह्मका लोकाः ससुरासुरमानवाः |
५ क
आदि पर्व
अध्याय
५०
आस्तीक उवाच
इमे हि ते सूर्यहुताशवर्चसः; समासते वृत्रहणः क्रतुं यथा |
८ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५६
सौदास उवाच
इमे हि दिव्ये मणिकुण्डले मे; देवाश्च यक्षाश्च महोरगाश्च |
२२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२७३
भीष्म उवाच
इमे हि भूतले देवाः प्रथिताः कुरुनन्दन ||
५९ ख
वन पर्व
अध्याय
२९६
वैशम्पाय़न उवाच
इमे हि भ्रातरः श्रान्तास्तव तात पिपासिताः ||
६ ख
वन पर्व
अध्याय
१५३
वैशम्पाय़न उवाच
इमे ह्यकस्मादुत्पाता महासमरदर्शिनः |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३२६
भीष्म उवाच
इमे ह्यनिन्द्रिय़ाहारा मद्भक्ताश्चन्द्रवर्चसः |
१८ क
शल्य पर्व
अध्याय
२९
सञ्जय़ उवाच
इमे ह्याय़ान्ति संहृष्टाः पाण्डवा जितकाशिनः |
६० क
वन पर्व
अध्याय
२३५
चित्रसेन उवाच
इमेऽवहसितुं प्राप्ता द्रौपदीं च यशस्विनीम् ||
४ ख
वन पर्व
अध्याय
३६
भीमसेन उवाच
इमौ च सिंहसङ्काशौ भ्रातरौ सहितौ शिशू |
२५ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१२३
वैशम्पाय़न उवाच
इमौ तु वृद्धौ शोचामि गान्धारीं पितरं च ते ||
१९ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
४
वैशम्पाय़न उवाच
इमौ तौ परिघप्रख्यौ भुजौ मम दुरासदौ |
८ क
स्त्री पर्व
अध्याय
२५
गान्धार्यु उवाच
इमौ तौ परिघप्रख्यौ वाहू शुभतलाङ्गुली |
३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
३५
प्रह्राद उवाच
इमौ तौ सम्प्रदृश्येते याभ्यां न चरितं सह |
१७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
७
वैशम्पाय़न उवाच
इमौ वृद्धौ च शोकाग्नौ प्रक्षिप्य स सुय़ोधनः |
२८ क
विराट पर्व
अध्याय
४८
वैशम्पाय़न उवाच
इमौ हि वाणौ सहितौ पादय़ोर्मे व्यवस्थितौ |
६ क