शान्ति पर्व
अध्याय
२६२
कपिल उवाच
आगमाश्च यथाकालं सङ्कल्पाश्च यथाव्रतम् ||
१४ ख
वन पर्व
अध्याय
८९
वैशम्पाय़न उवाच
आगमिष्यति ते भ्राता कृतास्त्रः क्षिप्रमर्जुनः |
१७ क
सभा पर्व
अध्याय
७२
धृतराष्ट्र उवाच
आगमिष्यति धुन्वानो गदां दण्डमिवान्तकः ||
३१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३५
सञ्जय़ उवाच
आगमिष्यति निर्वेदं धर्मपुत्रो युधिष्ठिरः |
१३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१५
सञ्जय़ उवाच
आगमिष्यति नो नूनं धार्तराष्ट्रस्य संय़ुगे ||
४० ग
द्रोण पर्व
अध्याय
५०
सञ्जय़ उवाच
आगमिष्यति वः क्षिप्रं फलं पापस्य कर्मणः |
५८ क
सभा पर्व
अध्याय
७२
धृतराष्ट्र उवाच
आगमिष्यति वीभत्सुः पाञ्चालैरभिरक्षितः ||
३० ख
मौसल पर्व
अध्याय
७
वसुदेव उवाच
आगमिष्यति वीभत्सुरिमां द्वारवतीं पुरीम् ||
१३ ख
आदि पर्व
अध्याय
१९८
वैशम्पाय़न उवाच
आगमिष्यन्ति कौन्तेय़ाः कुन्ती च सह कृष्णय़ा ||
२५ ग
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८८
वैशम्पाय़न उवाच
आगमिष्यन्ति राजानः सर्वतः कौरवान्प्रति |
१५ क
सभा पर्व
अध्याय
३
वैशम्पाय़न उवाच
आगमिष्यामि तद्गृह्य यदि तिष्ठति भारत ||
३ ख
वन पर्व
अध्याय
१८५
मार्कण्डेय़ उवाच
आगमिष्याम्यहं शृङ्गी विज्ञेय़स्तेन तापस ||
३१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
९३
सञ्जय़ उवाच
आगमिष्ये ततः क्षिप्रं त्वत्सकाशमरिन्दम |
१७ क
आदि पर्व
अध्याय
२१३
वैशम्पाय़न उवाच
आगमे च प्रय़ोगे च चक्रे तुल्यमिवात्मनः |
६७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२८
जनक उवाच
आगमे यदि वापाय़े ज्ञातीनां द्रविणस्य च |
४ क
वन पर्व
अध्याय
१७६
वैशम्पाय़न उवाच
आगमे यदि वापाय़े न तत्र ग्लपय़ेन्मनः ||
२६ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
२८
व्राह्मण उवाच
आगमे वर्तमानस्य न मे दोषोऽस्ति कश्चन ||
१० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३१८
नारद उवाच
आगमेन सहान्येषां विनाश उपपद्यते ||
२६ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
९४
वैशम्पाय़न उवाच
आगमेनैव ते यज्ञं कुर्वन्तु यदि हेच्छसि |
१५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२११
भीष्म उवाच
आगमैरपकृष्यन्ते हस्तिपैर्हस्तिनो यथा ||
४४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१२०
भीष्म उवाच
आगमैरुपदिष्टानि स्वस्य चैव परस्य च ||
२० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२६
युधिष्ठिर उवाच
आगमैर्वहुभिः स्फीतो भवान्नः प्रथितः कुले ||
१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२६१
स्यूमरश्मिरु उवाच
आगमो वेदवादस्तु तर्कशास्त्राणि चागमः |
४० क
शान्ति पर्व
अध्याय
४८
युधिष्ठिर उवाच
आगमो हि परः कृष्ण त्वत्तो नो वासवानुज ||
१४ ख
आदि पर्व
अध्याय
१५८
गन्धर्व उवाच
आगमोऽस्या मय़ा प्रोक्तो वीर्यं प्रतिनिवोध मे ||
४१ ख
वन पर्व
अध्याय
१३
अर्जुन उवाच
आगम्य ऋषय़ः सर्वेऽय़ाचन्ताभय़मच्युत ||
३३ ख
आदि पर्व
अध्याय
२०५
वैशम्पाय़न उवाच
आगम्य खाण्डवप्रस्थमुदक्रोशत पाण्डवान् ||
६ ख
शल्य पर्व
अध्याय
५२
कुरुरु उवाच
आगम्य च ततः शक्रस्तदा राजर्षिमव्रवीत् |
१२ क
वन पर्व
अध्याय
१९५
मार्कण्डेय़ उवाच
आगम्य च स दुष्टात्मा तं देशं भरतर्षभ |
७ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
६१
वैशम्पाय़न उवाच
आगम्य चाव्रवीद्धीमान्पृथां पृथुललोचनाम् |
९ ख
आदि पर्व
अध्याय
१२०
वैशम्पाय़न उवाच
आगम्य चास्मै गोत्रादि सर्वमाख्यातवांस्तदा ||
१९ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२९
सञ्जय़ उवाच
आगम्य तु ततः सर्वे नष्टं दुर्योधनं नृपम् |
३७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
९४
सञ्जय़ उवाच
आगम्य तु ततो राजा विसृज्य च महाजनम् |
२० क
शान्ति पर्व
अध्याय
७५
भीष्म उवाच
आगम्य पर्युपासन्ते मामीशं सुखदुःखय़ोः ||
१० ख
वन पर्व
अध्याय
१०५
लोमश उवाच
आगम्य पितरं चोचुस्ततः प्राञ्जलय़ोऽग्रतः |
१४ क
वन पर्व
अध्याय
१०५
लोमश उवाच
आगम्य पितुराचख्युरदृश्यं तुरगं हृतम् |
११ ख
वन पर्व
अध्याय
२१८
मार्कण्डेय़ उवाच
आगम्य मनुजव्याघ्र सह देव्या परन्तप |
२६ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३६
वैशम्पाय़न उवाच
आगम्य मम पुत्रार्थे सर्वे मृत्युवशं गताः ||
२८ ख
वन पर्व
अध्याय
२४६
व्यास उवाच
आगम्य वुभुजे सर्वमन्नमुञ्छोपजीविनः ||
१८ ख
वन पर्व
अध्याय
२९५
वैशम्पाय़न उवाच
आगम्य व्राह्मणस्तूर्णं सन्तप्त इदमव्रवीत् ||
७ ख
शल्य पर्व
अध्याय
६२
वैशम्पाय़न उवाच
आगम्य शिविरं रात्रौ सोऽभ्यगच्छत पाण्डवान् |
७३ क
वन पर्व
अध्याय
८८
धौम्य उवाच
आगम्य सरितः सर्वा मधुना समतर्पय़न् ||
१६ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२४
सञ्जय़ उवाच
आगम्य सहसा केचिद्रथैः स्वर्णविभूषितैः |
१५ क
आदि पर्व
अध्याय
९४
वैशम्पाय़न उवाच
आगम्य हास्तिनपुरं शन्तनोः संन्यवेदय़त् ||
९२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१४५
वैशम्पाय़न उवाच
आगम्य हास्तिनपुरादुपप्लव्यमरिन्दमः |
१ क
शल्य पर्व
अध्याय
५२
कुरुरु उवाच
आगम्यागम्य चैवैनं भूय़ो भूय़ोऽवहस्य च |
८ क
आदि पर्व
अध्याय
१६५
गन्धर्व उवाच
आगम्याभिमुखी पार्थ तस्थौ भगवदुन्मुखी |
२३ क
वन पर्व
अध्याय
१७२
वैशम्पाय़न उवाच
आगम्याह वचः पार्थं श्रवणीय़मिदं नृप ||
१७ ख
वन पर्व
अध्याय
२१३
मार्कण्डेय़ उवाच
आगम्याहवनीय़ं वै तैर्द्विजैर्मन्त्रतो हुतम् ||
४० ग
आदि पर्व
अध्याय
१७१
और्व उवाच
आगर्भोत्सादनं क्षान्तं तदा मां मन्युराविषत् ||
६ ख