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द्रोण पर्व
अध्याय १०
धृतराष्ट्र उवाच
आहूता वृष्णिवीरेण केशवेन महात्मना |
३० क
शल्य पर्व
अध्याय ३७
वैशम्पाय़न उवाच
आहूता सरितां श्रेष्ठा गय़यज्ञे सरस्वती ||
१९ ख
आदि पर्व
अध्याय ८६
यय़ातिरु उवाच
आहूताध्याय़ी गुरुकर्मस्वचोद्यः; पूर्वोत्थाय़ी चरमं चोपशाय़ी |
२ क
शान्ति पर्व
अध्याय ५५
भीष्म उवाच
आहूतेन रणे नित्यं योद्धव्यं क्षत्रवन्धुना |
१७ क
द्रोण पर्व
अध्याय १५७
धृतराष्ट्र उवाच
आहूतो न निवर्तेय़मिति तस्य महाव्रतम् |
३ क
सभा पर्व
अध्याय ५३
युधिष्ठिर उवाच
आहूतो न निवर्तेय़मिति मे व्रतमाहितम् |
१३ क
द्रोण पर्व
अध्याय १६
सञ्जय़ उवाच
आहूतो न निवर्तेय़मिति मे व्रतमाहितम् |
३९ क
सभा पर्व
अध्याय ६७
युधिष्ठिर उवाच
आहूतो विनिवर्तेत दीव्यामि शकुने त्वय़ा ||
१७ ख
सभा पर्व
अध्याय ६१
अर्जुन उवाच
आहूतो हि परै राजा क्षात्रधर्ममनुस्मरन् |
९ क
सभा पर्व
अध्याय ५२
युधिष्ठिर उवाच
आहूतोऽहं न निवर्ते कदा चि; त्तदाहितं शाश्वतं वै व्रतं मे ||
१६ ख
वन पर्व
अध्याय ५
विदुर उवाच
आहूय़ कुन्तीसुतमक्षवत्यां; पराजैषीत्सत्यसन्धं सुतस्ते ||
५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ४९
वासुदेव उवाच
आहूय़ चाह तां भार्यामृचीको भार्गवस्तदा |
९ क
आदि पर्व
अध्याय ९६
वैशम्पाय़न उवाच
आहूय़ दानं कन्यानां गुणवद्भ्यः स्मृतं वुधैः |
८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ४०
भीष्म उवाच
आहूय़ दय़ितं शिष्यं विपुलं प्राह भार्गवम् ||
२१ ख
वन पर्व
अध्याय ४९
वैशम्पाय़न उवाच
आहूय़ निकृतिप्रज्ञैः कितवैरक्षकोविदैः ||
३२ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय २१
वैशम्पाय़न उवाच
आहूय़ पाण्डवान्वीरान्वनवासकृतक्षणः ||
१ ख
वन पर्व
अध्याय ६१
दमय़न्त्यु उवाच
आहूय़ पृथिवीपालः सत्यधर्मपराय़णः |
७८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १९५
वैशम्पाय़न उवाच
आहूय़ भरतश्रेष्ठ इदं वचनमव्रवीत् ||
१ ख
सभा पर्व
अध्याय ६०
द्रौपद्यु उवाच
आहूय़ राजा कुशलैः सभाय़ां; दुष्टात्मभिर्नैकृतिकैरनार्यैः |
४३ क
वन पर्व
अध्याय १५
कृष्ण उवाच
आहूय़ शाल्वं समरे युद्धाय़ समवस्थितः ||
२० ख
शल्य पर्व
अध्याय ४२
वैशम्पाय़न उवाच
आहूय़ सरितां श्रेष्ठामिदं वचनमव्रुवन् ||
८ ख
वन पर्व
अध्याय २४१
वैशम्पाय़न उवाच
आहूय़न्तां द्विजवराः सम्भाराश्च यथाविधि |
२१ क
विराट पर्व
अध्याय ६१
वैशम्पाय़न उवाच
आहूय़मानस्तु स तेन सङ्ख्ये; महामना धृतराष्ट्रस्य पुत्रः |
१ क
द्रोण पर्व
अध्याय २६
सञ्जय़ उवाच
आहूय़मानस्य च तैरभवद्धृदय़ं द्विधा ||
१२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २७३
भीष्म उवाच
आहूय़ाप्सरसो देवस्ततो लोकपितामहः |
४१ क
उद्योग पर्व
अध्याय १५७
सञ्जय़ उवाच
आहूय़ोपह्वरे राजन्नुलूकमिदमव्रवीत् ||
२ ख
सभा पर्व
अध्याय ४७
दुर्योधन उवाच
आहृतं भूमिपालैर्हि वसु मुख्यं ततस्ततः ||
१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ८८
वैशम्पाय़न उवाच
आहृतं येन वीर्येण कुरूणां सर्वराजसु ||
३१ ख
सभा पर्व
अध्याय ३
वैशम्पाय़न उवाच
आहृताः क्रतवो मुख्याः शतं भरतसत्तम ||
१० ख
सभा पर्व
अध्याय २८
वैशम्पाय़न उवाच
आहृतिं कौशिकाचार्यं यत्नेन महता ततः |
३९ क
उद्योग पर्व
अध्याय १५५
वैशम्पाय़न उवाच
आहृतीनामधिपतेर्भोजस्यातिय़शस्विनः |
२ क
वन पर्व
अध्याय २४३
वैशम्पाय़न उवाच
आहृतेऽहं नरश्रेष्ठ त्वां सभाजय़िता पुनः ||
१० ख
द्रोण पर्व
अध्याय १२६
सञ्जय़ उवाच
आहृतो धृतराष्ट्रस्य संमते कुरुसंसदि ||
१८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ४७
सञ्जय़ उवाच
आहृत्य कृष्णो मणिकुण्डले ते; हत्वा च भौमं नरकं मुरं च |
७९ क
सभा पर्व
अध्याय ४८
दुर्योधन उवाच
आहृत्य रमणीय़ार्थान्दूरजान्मृगपक्षिणः ||
१० ख
कर्ण पर्व
अध्याय २७
सञ्जय़ उवाच
आहेय़ो विषवानुग्रो नराश्वद्विपसङ्घहा ||
५८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ६५
धृतराष्ट्र उवाच
आहो स्विच्छकटव्यूहं प्रविष्टा मोघनिश्चय़ाः |
२ क
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय ५
जनमेजय़ उवाच
आहो स्विच्छाश्वतं स्थानं तेषां तत्र द्विजोत्तम |
५ क
उद्योग पर्व
अध्याय १७३
भीष्म उवाच
आहो स्वित्पितरं मूढं यो मेऽकार्षीत्स्वय़ंवरम् ||
३ ख
वन पर्व
अध्याय ७१
वृहदश्व उवाच
आहो स्विदृतुपर्णोऽपि यथा राजा नलस्तथा |
३३ क
द्रोण पर्व
अध्याय ११
सञ्जय़ उवाच
आहो स्विद्धर्मपुत्रस्य द्वेष्टा तस्य न विद्यते |
१० क
द्रोण पर्व
अध्याय ५०
सञ्जय़ उवाच
आहो स्विद्भूषणार्थाय़ वर्मशस्त्राय़ुधानि वः |
७८ क
द्रोण पर्व
अध्याय १००
सञ्जय़ उवाच
आह्णिकेषु समूहेषु तव सैन्यस्य मानद |
६ क
उद्योग पर्व
अध्याय १०८
सुपर्ण उवाच
आह्निकं चैव नैशं च दुःखस्पर्शं विमुञ्चति |
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ६६
भीष्म उवाच
आह्निकं भूतय़ज्ञांश्च पितृय़ज्ञांश्च मानुषान् |
८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ७५
भीष्म उवाच
आह्वानं च प्रय़ुञ्जीत समङ्गे वहुलेति च |
६ क
उद्योग पर्व
अध्याय १४२
वैशम्पाय़न उवाच
आह्वानं देवसंय़ुक्तं वसन्त्याः पितृवेश्मनि ||
१९ ख
वन पर्व
अध्याय २९०
वैशम्पाय़न उवाच
आह्वानमकरोत्साथ तस्य देवस्य भामिनी ||
६ ख
वन पर्व
अध्याय २३९
वैशम्पाय़न उवाच
आह्वानाय़ तदा चक्रुः कर्म वैतानसम्भवम् ||
१९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ७७
भीष्म उवाच
आह्वाय़का देवलका नक्षत्रग्रामय़ाजकाः |
८ क