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शान्ति पर्व
अध्याय ६९
भीष्म उवाच
आरामेषु तथोद्याने पण्डितानां समागमे |
१२ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
आरालिकाः सूपकारा रागखाण्डविकास्तथा |
१७ क
विराट पर्व
अध्याय २
भीम उवाच
आरालिको गोविकर्ता सूपकर्ता निय़ोधकः |
७ क
द्रोण पर्व
अध्याय ३१
सञ्जय़ उवाच
आरावं तुमुलं कुर्वन्नभ्यवर्तत तान्रणे ||
५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ६५
सञ्जय़ उवाच
आरावं परमं कृत्वा वध्यमानाः किरीटिना |
१७ क
आदि पर्व
अध्याय १७१
और्व उवाच
आरावं मातृवर्गस्य भृगूणां क्षत्रिय़ैर्वधे ||
५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ९
वैशम्पाय़न उवाच
आरावं विपुलं कुर्वन्व्यथय़न्सर्वकौरवान् |
२६ क
विराट पर्व
अध्याय ३३
वैशम्पाय़न उवाच
आरावः सुमहानासीत्सम्प्रहारे भय़ङ्करे ||
६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ४७
वैशम्पाय़न उवाच
आरिराधय़िषुः कृष्णं वाचं जिगमिषामि याम् |
१० क
आदि पर्व
अध्याय १६२
गन्धर्व उवाच
आरिराधय़िषुः सूर्यं तस्थावूर्ध्वभुजः क्षितौ ||
११ ख
वन पर्व
अध्याय १०७
लोमश उवाच
आरिराधय़िषुर्गङ्गां तपसा दग्धकिल्विषः |
४ क
आदि पर्व
अध्याय ११४
वैशम्पाय़न उवाच
आरिराधय़िषुर्देवं त्रिदशानां तमीश्वरम् |
२१ क
वन पर्व
अध्याय १९२
मार्कण्डेय़ उवाच
आरिराधय़िषुर्विष्णुं वहून्वर्षगणान्विभो ||
९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५०
सञ्जय़ उवाच
आरुग्णः सिन्धुवेगेन सानुमानिव पर्वतः ||
३७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ८२
वैशम्पाय़न उवाच
आरुजन्गणशो वृक्षान्परुषो भीमनिस्वनः ||
१० ख
द्रोण पर्व
अध्याय ३९
सञ्जय़ उवाच
आरुजन्तं रथश्रेष्ठान्वज्रहस्तमिवासुरान् ||
२५ ख
आदि पर्व
अध्याय १३८
वैशम्पाय़न उवाच
आरुजन्दारुगुल्मांश्च पथस्तस्य समीपजान् ||
२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ४७
सञ्जय़ उवाच
आरुजन्निव मे प्राणान्मोहय़न्नपि साय़कैः |
२१ क
उद्योग पर्व
अध्याय ५०
धृतराष्ट्र उवाच
आरुजन्पुरुषव्याघ्रो रथिनः सादिनस्तथा ||
३४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय २४
सञ्जय़ उवाच
आरुजन्प्ररुजन्भञ्जन्निघ्नन्विद्रावय़न्क्षिपन् |
५६ क
द्रोण पर्व
अध्याय १०२
सञ्जय़ उवाच
आरुजन्विरुजन्पार्थो ज्यां विकर्षंश्च पाणिना |
६६ क
उद्योग पर्व
अध्याय ७३
वैशम्पाय़न उवाच
आरुज्य वृक्षान्निर्मूलान्गजः परिभुजन्निव |
८ क
वन पर्व
अध्याय १५४
वैशम्पाय़न उवाच
आरुज्यारुज्य तौ वृक्षानन्योन्यमभिजघ्नतुः |
४७ क
आदि पर्व
अध्याय ५९
वैशम्पाय़न उवाच
आरुणिर्वारुणिश्चैव वैनतेय़ा इति स्मृताः ||
३९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १५८
सञ्जय़ उवाच
आरुरुक्षुर्यथा मन्दः पर्वतं गन्धमादनम् ||
१२ ख
वन पर्व
अध्याय २२४
वैशम्पाय़न उवाच
आरुरुक्षू रथं सत्यामाह्वय़ामास केशवः ||
२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय २८
श्रीभगवानु उवाच
आरुरुक्षोर्मुनेर्योगं कर्म कारणमुच्यते |
३ क
सभा पर्व
अध्याय ४३
वैशम्पाय़न उवाच
आरुरोह ततः सर्वे जहसुस्ते पुनर्जनाः ||
९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५०
सञ्जय़ उवाच
आरुरोह ततो मध्यं नागराजस्य मारिष |
३५ क
भीष्म पर्व
अध्याय ७९
सञ्जय़ उवाच
आरुरोह ततो यानं भ्रातुरेव यशस्विनः ||
४६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८०
सञ्जय़ उवाच
आरुरोह ततो यानं शतानीकस्य मारिष ||
३७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय २४
देवा ऊचुः
आरुरोह तदा यत्तः कम्पय़न्निव रोदसी ||
९३ ख
आदि पर्व
अध्याय ४७
सूत उवाच
आरुरोह प्रतिज्ञां स सर्पसत्राय़ पार्थिवः |
१ ख
वन पर्व
अध्याय ७१
वृहदश्व उवाच
आरुरोह महद्वेश्म पुण्यश्लोकदिदृक्षय़ा ||
१६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय २६
सञ्जय़ उवाच
आरुरोह महातेजाः शल्यः सिंह इवाचलम् ||
१० ख
शल्य पर्व
अध्याय ९
सञ्जय़ उवाच
आरुरोह महावाहुः सर्वसैन्यस्य पश्यतः ||
१८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ७३
सञ्जय़ उवाच
आरुरोह महावाहुरभिमन्योर्महारथम् ||
६७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३८
वैशम्पाय़न उवाच
आरुरोह यथा देवः सोमोऽमृतमय़ं रथम् ||
३३ ख
वन पर्व
अध्याय २३
वैशम्पाय़न उवाच
आरुरोह रथं कृष्णः पाण्डवैरभिपूजितः ||
४४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १४२
सञ्जय़ उवाच
आरुरोह रथं चापि पाञ्चाल्यस्य महात्मनः |
१९ क
द्रोण पर्व
अध्याय १४८
सञ्जय़ उवाच
आरुरोह रथं चापि सहदेवस्य मारिष ||
७ ग
कर्ण पर्व
अध्याय १७
सञ्जय़ उवाच
आरुरोह रथं चापि सूतपुत्रप्रतापितः |
९७ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९२
सञ्जय़ उवाच
आरुरोह रथं चैव हार्दिक्यस्य महात्मनः ||
३९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३४
सञ्जय़ उवाच
आरुरोह रथं तूर्णं कृपस्य शरपीडितः ||
५१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १४२
सञ्जय़ उवाच
आरुरोह रथं तूर्णं तमेव ध्वजमालिनम् ||
२८ ख
शल्य पर्व
अध्याय १३
सञ्जय़ उवाच
आरुरोह रथं तूर्णं तमेव रथिनां वरः ||
४१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १००
सञ्जय़ उवाच
आरुरोह रथं तूर्णं दुर्मुखस्य विशां पते ||
२२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८२
सञ्जय़ उवाच
आरुरोह रथं तूर्णं नकुलस्य महात्मनः ||
१२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ९८
सञ्जय़ उवाच
आरुरोह रथं तूर्णं भारद्वाजस्य मारिष |
४९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १४६
सञ्जय़ उवाच
आरुरोह रथं तूर्णं भास्वरं कृतवर्मणः ||
२३ ख