chevron_left  अद्राक्षमृषिमाय़ान्तंarrow_drop_down
शान्ति पर्व
अध्याय १२६
भीष्म उवाच
अद्राक्षमृषिमाय़ान्तं तनुं नाम तपोनिधिम् ||
६ ख
आदि पर्व
अध्याय ११४
वैशम्पाय़न उवाच
अद्रिका च तथा साची मिश्रकेशी अलम्वुसा ||
५० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १७
उपमन्युरु उवाच
अद्रिरद्र्यालय़ः कर्ता मृगवाणार्पणोऽनघः ||
३७ ख
वन पर्व
अध्याय ४३
वैशम्पाय़न उवाच
अद्रिराज महाशैल मुनिसंश्रय़ तीर्थवन् |
२४ क
वन पर्व
अध्याय १०२
लोमश उवाच
अद्रिराजं महाशैलं मरुं कनकपर्वतम् |
२ क
भीष्म पर्व
अध्याय १५
धृतराष्ट्र उवाच
अद्रिसारमय़ं नूनं सुदृढं हृदय़ं मम |
५३ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय १
धृतराष्ट्र उवाच
अद्रिसारमय़ं नूनं हृदय़ं मम सञ्जय़ |
१० क
शल्य पर्व
अध्याय ३१
सञ्जय़ उवाच
अद्रिसारमय़ीं गुर्वीं काञ्चनाङ्गदभूषणाम् |
३५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५८
सञ्जय़ उवाच
अद्रिसारमय़ीं गुर्वीं प्रगृह्य महतीं गदाम् |
३३ क
शल्य पर्व
अध्याय ५६
सञ्जय़ उवाच
अद्रिसारमय़ीं गुर्वीमाविध्यन्वह्वशोभत ||
३० ख
शल्य पर्व
अध्याय ५४
सञ्जय़ उवाच
अद्रिसारमय़ीं भीमस्तथैवादाय़ वीर्यवान् |
२१ क
वन पर्व
अध्याय १७०
अर्जुन उवाच
अद्रिसारमय़ैश्चान्यैर्वाणैररिविदारणैः |
४९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ९७
सञ्जय़ उवाच
अद्रीणां भिद्यमानानामन्तरिक्षे शितैः शरैः |
४१ क
आदि पर्व
अध्याय १७
सूत उवाच
अद्रीणामिव कूटानि धातुरक्तानि शेरते ||
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २१
देवस्थान उवाच
अद्रोहः सत्यवचनं संविभागो धृतिः क्षमा |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय १५६
भीष्म उवाच
अद्रोहः सर्वभूतेषु कर्मणा मनसा गिरा |
२१ क
शान्ति पर्व
अध्याय १२४
धृतराष्ट्र उवाच
अद्रोहः सर्वभूतेषु कर्मणा मनसा गिरा |
६४ क
वन पर्व
अध्याय २८१
सावित्र्यु उवाच
अद्रोहः सर्वभूतेषु कर्मणा मनसा गिरा |
३४ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९३
वैशम्पाय़न उवाच
अद्रोहः सर्वभूतेषु सन्तोषः शीलमार्जवम् |
९३ क
शान्ति पर्व
अध्याय २५१
भीष्म उवाच
अद्रोहमविसंवादं प्रवर्तन्ते तदाश्रय़ाः |
११ ख
सभा पर्व
अध्याय ५०
दुर्योधन उवाच
अद्रोहे समय़ं कृत्वा चिच्छेद नमुचेः शिरः |
२० क
शान्ति पर्व
अध्याय २१
देवस्थान उवाच
अद्रोहेणैव भूतानां यो धर्मः स सतां मतः ||
१० ख
शान्ति पर्व
अध्याय २५४
भीष्म उवाच
अद्रोहेणैव भूतानामल्पद्रोहेण वा पुनः |
६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ३७
भीष्म उवाच
अद्रोहो नातिमानश्च ह्रीस्तितिक्षा तपः शमः ||
८ ख
वन पर्व
अध्याय १९८
व्याध उवाच
अद्रोहो नातिमानश्च ह्रीस्तितिक्षा दमः शमः ||
८७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ८०
भीष्म उवाच
अद्रोहो नाभिमानश्च ह्रीस्तितिक्षा दमः शमः ||
४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २६२
कपिल उवाच
अद्रोहो नाभिमानश्च ह्रीस्तितिक्षा शमस्तथा ||
३७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १२८
भीष्म उवाच
अद्वारतः प्रद्रवति यदा भवति पीडितः ||
२२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १२४
भीष्म उवाच
अद्वारे न च तिष्ठामि चिरं न कथय़ामि च ||
११ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २४६
व्यास उवाच
अद्वारेण तमेवार्थं द्वौ दोषावुपजीवतः ||
११ ख
सभा पर्व
अध्याय १९
वैशम्पाय़न उवाच
अद्वारेण प्रविष्टाः स्थ निर्भय़ा राजकिल्विषात् ||
४१ ख
सभा पर्व
अध्याय ३९
शिशुपाल उवाच
अद्वारेण प्रविष्टेन छद्मना व्रह्मवादिना |
३ क
सभा पर्व
अध्याय १९
वैशम्पाय़न उवाच
अद्वारेण रिपोर्गेहं द्वारेण सुहृदो गृहम् |
४९ क
सभा पर्व
अध्याय ४६
दुर्योधन उवाच
अद्वारेण विनिर्गच्छन्द्वारसंस्थानरूपिणा |
३२ ख
विराट पर्व
अध्याय २२
वैशम्पाय़न उवाच
अद्वारेणाभ्यवस्कन्द्य निर्जगाम वहिस्तदा ||
१७ ग
सौप्तिक पर्व
अध्याय ८
सञ्जय़ उवाच
अद्वारेणाभ्यवस्कन्द्य विहाय़ भय़मात्मनः ||
९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १४
उपमन्युरु उवाच
अद्वितीय़मनिर्देश्यं सर्वभूतभय़ावहम् |
१२५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १४१
भीष्म उवाच
अद्वितीय़ेन मुनिना जपता चर्मवाससा |
१३ क
सभा पर्व
अध्याय ५०
धृतराष्ट्र उवाच
अद्विषन्तं कथं द्विष्यात्त्वादृशो भरतर्षभ ||
२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १३३
महेश्वर उवाच
अद्वेषी सुमुखः श्लक्ष्णः स्निग्धवाणीप्रदः सदा ||
२५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ३४
श्रीभगवानु उवाच
अद्वेष्टा सर्वभूतानां मैत्रः करुण एव च |
१३ क
शान्ति पर्व
अध्याय १४०
भीष्म उवाच
अद्वैधज्ञः पथि द्वैधे संशय़ं प्राप्तुमर्हति |
८ क
शान्ति पर्व
अध्याय २८७
पराशर उवाच
अद्वैधमनसं युक्तं शूरं धीरं विपश्चितम् |
४१ क
उद्योग पर्व
अध्याय ७४
वैशम्पाय़न उवाच
अधः पादतलेनैतानधिष्ठास्यामि भूतले ||
११ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २९८
याज्ञवल्क्य उवाच
अधः श्रोत्रेन्द्रिय़ग्राम उत्पद्यति नराधिप |
२२ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३१९
भीष्म उवाच
अधःकाय़ोर्ध्ववक्त्रश्च नेत्रैः समभिवाह्यते ||
१६ ख
वन पर्व
अध्याय २५९
मार्कण्डेय़ उवाच
अधःशाय़ी कुम्भकर्णो यताहारो यतव्रतः |
१७ क
द्रोण पर्व
अध्याय ५०
सञ्जय़ उवाच
अधक्ष्यं तानहं सर्वांस्तदा क्रूरान्महारथान् ||
६० ख
शान्ति पर्व
अध्याय १२८
भीष्म उवाच
अधनं दुर्वलं प्राहुर्धनेन वलवान्भवेत् |
४९ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९२
सञ्जय़ उवाच
अधनस्य मृतं श्रेय़ो न च ज्ञातिवधाद्धनम् |
६ क