शल्य पर्व
अध्याय
५
सञ्जय़ उवाच
अथ हैमवते प्रस्थे स्थित्वा युद्धाभिनन्दिनः |
१ क
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
अथर्चीकादय़ोऽभ्येत्य पितरो व्राह्मणर्षभम् |
६ क
वन पर्व
अध्याय
२१२
मार्कण्डेय़ उवाच
अथर्वन्गच्छ मध्वक्षं प्रिय़मेतत्कुरुष्व मे ||
८ ग
आदि पर्व
अध्याय
६४
वैशम्पाय़न उवाच
अथर्ववेदप्रवराः पूगय़ाज्ञिक संमताः |
३३ क
वन पर्व
अध्याय
२३९
वैशम्पाय़न उवाच
अथर्ववेदप्रोक्तैश्च याश्चोपनिषदि क्रिय़ाः |
२० ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१८
शल्य उवाच
अथर्ववेदमन्त्रैश्च देवेन्द्रं समपूजय़त् ||
५ ख
सभा पर्व
अध्याय
११
नारद उवाच
अथर्ववेदश्च तथा पर्वाणि च विशां पते ||
२३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०
भीष्म उवाच
अथर्ववेदे वेदे च वभूवर्षिः सुनिश्चितः |
३४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
९०
भीष्म उवाच
अथर्वशिरसोऽध्येता व्रह्मचारी यतव्रतः |
२२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१७
उपमन्युरु उवाच
अथर्वशीर्षः सामास्य ऋक्सहस्रामितेक्षणः ||
८८ ख
वन पर्व
अध्याय
२१२
मार्कण्डेय़ उवाच
अथर्वा त्वसृजल्लोकानात्मनालोक्य पावकम् |
१८ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१८
शल्य उवाच
अथर्वाङ्गिरसं नाम अस्मिन्वेदे भविष्यति |
७ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२४
देवा ऊचुः
अथर्वाङ्गिरसावास्तां चक्ररक्षौ महात्मनः |
८० क
कर्ण पर्व
अध्याय
४९
वासुदेव उवाच
अथर्वाङ्गिरसी ह्येषा श्रुतीनामुत्तमा श्रुतिः |
६९ क
वन पर्व
अध्याय
२१२
मार्कण्डेय़ उवाच
अथर्वाणं तथा चापि हव्यवाहोऽव्रवीद्वचः ||
१० ख
वन पर्व
अध्याय
१११
लोमश उवाच
अथर्श्यशृङ्गं विकृतं समीक्ष्य; पुनः पुनः पीड्य च काय़मस्य |
१७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
२०
भीष्म उवाच
अथर्षिरभिसम्प्रेक्ष्य स्त्रिय़ं तां जरय़ान्विताम् |
७१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
५२
भीष्म उवाच
अथर्षिश्चोदय़ामास पानमन्नं तथैव च ||
२५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
८२
भीष्म उवाच
अथर्षय़ः सगन्धर्वाः किंनरोरगराक्षसाः |
८ क
आदि पर्व
अध्याय
७
सूत उवाच
अथर्षय़ः समुद्विग्ना देवान्गत्वाव्रुवन्वचः |
१४ क
शल्य पर्व
अध्याय
४१
वैशम्पाय़न उवाच
अथर्षय़श्च देवाश्च गन्धर्वाप्सरसस्तथा |
३८ क
आदि पर्व
अध्याय
७
सूत उवाच
अथर्षय़श्च देवाश्च व्रह्माणमुपगम्य तु |
१५ क
आदि पर्व
अध्याय
१९३
दुर्योधन उवाच
अथवा कुशलाः केचिदुपाय़निपुणा नराः |
८ क
आदि पर्व
अध्याय
१९३
दुर्योधन उवाच
अथवा दर्शनीय़ाभिः प्रमदाभिर्विलोभ्यताम् |
१५ क
आदि पर्व
अध्याय
१९३
दुर्योधन उवाच
अथवा पाण्डवांस्तस्यां भेदय़न्तु ततश्च ताम् ||
९ ख
आदि पर्व
अध्याय
१४५
व्राह्मण उवाच
अथवा मद्विनाशोऽय़ं न हि शक्ष्यामि कञ्चन |
३० क
आदि पर्व
अध्याय
३३
सूत उवाच
अथवा य उपाध्याय़ः क्रतौ तस्मिन्भविष्यति |
१६ क
आदि पर्व
अध्याय
१४७
वैशम्पाय़न उवाच
अथवा यास्यसे तत्र त्यक्त्वा मां द्विजसत्तम |
१४ क
आदि पर्व
अध्याय
३३
सूत उवाच
अथवा संस्कृतं भोज्यं दूषय़न्तु भुजङ्गमाः |
२४ क
आदि पर्व
अध्याय
४१
सूत उवाच
अथवापि समग्रेण तरन्तु तपसा मम |
११ क
आदि पर्व
अध्याय
१४७
वैशम्पाय़न उवाच
अथवाहं करिष्यामि कुलस्यास्य विमोक्षणम् |
१३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१००
सञ्जय़ उवाच
अथाक्रन्दद्भीमसेनो धृष्टद्युम्नश्च मारिष |
१२ क
कर्ण पर्व
अध्याय
६०
सञ्जय़ उवाच
अथाक्रन्दे तुमुले वर्तमाने; धार्ष्टद्युम्ने निहते तत्र कृष्णः |
१० क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३९
वाय़ुरु उवाच
अथाख्यातमुतथ्याय़ ततः पत्न्यवमर्दनम् |
१७ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
९३
नकुल उवाच
अथागच्छद्द्विजः कश्चिदतिथिर्भुञ्जतां तदा |
११ क
आदि पर्व
अध्याय
३०
सूत उवाच
अथागतास्तमुद्देशं सर्पाः सोमार्थिनस्तदा |
१८ क
शल्य पर्व
अध्याय
४७
वैशम्पाय़न उवाच
अथागमत्त्रिनय़नः सुप्रीतो वरदस्तदा ||
३२ ख
वन पर्व
अध्याय
२३७
दुर्योधन उवाच
अथागम्य तमुद्देशं पाण्डवाः पुरुषर्षभाः |
९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०२
भीष्म उवाच
अथागम्य महातेजा भृगुर्व्रह्मविदां वरः |
१४ क
शल्य पर्व
अध्याय
४२
वैशम्पाय़न उवाच
अथागम्य महाभागास्तत्तीर्थं दारुणं तदा |
६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३९
वाय़ुरु उवाच
अथागम्य महाराज नमस्कृत्य च कश्यपम् |
७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०३
भीष्म उवाच
अथागस्त्यमृषिश्रेष्ठं वाहनाय़ाजुहाव ह |
१२ क
आदि पर्व
अध्याय
५
सूत उवाच
अथाग्निशरणेऽपश्यज्ज्वलितं जातवेदसम् |
१७ क
विराट पर्व
अध्याय
२५
वैशम्पाय़न उवाच
अथाग्रजानन्तरजः पापभावानुरागिणम् |
१३ क
कर्ण पर्व
अध्याय
५७
कर्ण उवाच
अथाग्र्यवाणैर्दशभिर्धनञ्जय़ं; पराभिनद्द्रोणसुतोऽच्युतं त्रिभिः |
५८ क
विराट पर्व
अध्याय
१५
वैशम्पाय़न उवाच
अथाङ्गुष्ठेनावमृद्नादङ्गुष्ठं तस्य धर्मराट् |
१२ क
वन पर्व
अध्याय
१९०
वैशम्पाय़न उवाच
अथाचष्ट मार्कण्डेय़ः ||
२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
११७
भीष्म उवाच
अथाजगाम तं देशं केसरी केसरारुणः |
२८ क
आदि पर्व
अध्याय
११४
वैशम्पाय़न उवाच
अथाजगाम देवेन्द्रो जनय़ामास चार्जुनम् ||
२७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
११५
नारद उवाच
अथाजगाम भगवान्दिवोदासं स गालवः |
१६ क