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उद्योग पर्व
अध्याय १२५
वैशम्पाय़न उवाच
अज्ञानाद्वा भय़ाद्वापि मय़ि वाले जनार्दन ||
२४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ४८
युधिष्ठिर उवाच
अज्ञानाद्वापि वर्णानां जाय़ते वर्णसङ्करः ||
१ ख
वन पर्व
अध्याय १२२
लोमश उवाच
अज्ञानाद्वालय़ा यत्ते कृतं तत्क्षन्तुमर्हसि ||
२१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ६
भीष्म उवाच
अज्ञानाद्व्राह्मणं हत्वा स्पृष्टो वालवधेन च |
३७ क
शान्ति पर्व
अध्याय १५३
भीष्म उवाच
अज्ञानान्निरय़ं याति तथाज्ञानेन दुर्गतिम् |
३ क
द्रोण पर्व
अध्याय १६५
सञ्जय़ उवाच
अज्ञानान्मूढवद्व्रह्मन्पुत्रदारधनेप्सय़ा ||
३० ख
भीष्म पर्व
अध्याय २७
श्रीभगवानु उवाच
अज्ञानेनावृतं ज्ञानं तेन मुह्यन्ति जन्तवः ||
१५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २८८
हंस उवाच
अज्ञानेनावृतो लोको मात्सर्यान्न प्रकाशते |
४० क
उद्योग पर्व
अध्याय १४८
वासुदेव उवाच
अज्ञापय़च्च राज्ञस्तान्पार्थिवान्दुष्टचेतसः |
३ क
वन पर्व
अध्याय २१९
मार्कण्डेय़ उवाच
अज्ञाय़माना गृह्णन्ति वालकान्रौद्रकर्मिणः ||
३१ ख
वन पर्व
अध्याय ६६
वृहदश्व उवाच
अज्ञाय़मानापि सती सुखमस्म्युषितेह वै |
१६ क
उद्योग पर्व
अध्याय १
कृष्ण उवाच
अज्ञाय़माने च मते परस्य; किं स्यात्समारभ्यतमं मतं वः ||
२३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ६९
भीष्म उवाच
अज्ञाय़मानो हीनत्वे कुर्यात्सन्धिं परेण वै |
१५ क
वन पर्व
अध्याय ३१
द्रौपद्यु उवाच
अज्ञो जन्तुरनीशोऽय़मात्मनः सुखदुःखय़ोः |
२७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १०८
भीष्म उवाच
अज्येष्ठः स्यादभागश्च निय़म्यो राजभिश्च सः ||
७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २२०
भीष्म उवाच
अज्येष्ठमकनिष्ठं च क्षिप्यमाणो न वुध्यसे ||
१०२ ख
वन पर्व
अध्याय २९९
वैशम्पाय़न उवाच
अजय़ञ्शात्रवान्युद्धे तथा त्वमपि जेष्यसि ||
१९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १२२
वैशम्पाय़न उवाच
अजय़त्खाण्डवप्रस्थे कस्तं युध्येत मानवः ||
५२ ख
विराट पर्व
अध्याय ३४
वैशम्पाय़न उवाच
अजय़त्खाण्डवप्रस्थे न हि यन्तास्ति तादृशः ||
१५ ख
विराट पर्व
अध्याय ५
वैशम्पाय़न उवाच
अजय़त्पश्चिमामाशां धनुषा येन पाण्डवः |
२२ क
सभा पर्व
अध्याय २७
वैशम्पाय़न उवाच
अजय़त्पाण्डवश्रेष्ठो नातितीव्रेण कर्मणा ||
२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १०३
सञ्जय़ उवाच
अजय़त्सर्वसैन्यानि शार्दूल इव गोवृषान् ||
२१ ख
आदि पर्व
अध्याय ५५
वैशम्पाय़न उवाच
अजय़द्भीमसेनस्तु दिशं प्राचीं महावलः |
२८ क
उद्योग पर्व
अध्याय ४९
वैशम्पाय़न उवाच
अजय़द्यः पुरा वीरो युध्यमानं पुरन्दरम् ||
२३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ११६
सञ्जय़ उवाच
अजय़द्राजपुत्रांस्तान्यतमानान्महारणे |
४ क
शान्ति पर्व
अध्याय २९
वैशम्पाय़न उवाच
अजय़द्वाहुवीर्येण भगवान्पाकशासनः ||
५७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १२२
धृतराष्ट्र उवाच
अजय़्यं रथमास्थाय़ वासुदेवस्य सात्यकिः |
७४ क
द्रोण पर्व
अध्याय १६४
सञ्जय़ उवाच
अजय़्यं समरे दृष्ट्वा साधु साध्विति सात्वतम् |
१५९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १२६
सञ्जय़ उवाच
अजय़्यं समरे नित्यं व्रुवाणं सव्यसाचिनम् ||
६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ४९
वासुदेव उवाच
अजय़्यः क्षत्रिय़ैर्लोके क्षत्रिय़र्षभसूदनः ||
१० ख
द्रोण पर्व
अध्याय १९
सञ्जय़ उवाच
अजय़्यमरिभिः सङ्ख्ये पार्षतं वाक्यमव्रवीत् ||
२१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ९५
वैशम्पाय़न उवाच
अजय़्यश्चाव्ययश्चैव शाश्वतः प्रभुरीश्वरः ||
३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ८७
सञ्जय़ उवाच
अजय़्या जैत्रमूहुस्तं विकुर्वन्तः स्म सैन्धवाः ||
६५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १५६
वासुदेव उवाच
अजय़्या हि विना योगैर्मृधे ते दैवतैरपि ||
६ ख
वन पर्व
अध्याय २५६
भीमसेन उवाच
अजय़्यांश्चाप्यवध्यांश्च वारय़िष्यसि तान्युधि |
२८ क
द्रोण पर्व
अध्याय १०८
धृतराष्ट्र उवाच
अजय़्याः पाण्डवास्तात देवैरपि सवासवैः |
९ क
द्रोण पर्व
अध्याय १२७
कर्ण उवाच
अजय़्यान्पाण्डवान्मन्ये द्रोणेनास्त्रविदा मृधे ||
१२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३३
सञ्जय़ उवाच
अजय़्याश्च रणे पार्था देवैरपि सवासवैः |
४६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १२४
भीष्म उवाच
अञ्जनं रोचनां चैव स्नानं माल्यानुलेपनम् |
१७ क
द्रोण पर्व
अध्याय ९७
सञ्जय़ उवाच
अञ्जनस्य कुले जाता वामनस्य च भारत |
२४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ६०
सञ्जय़ उवाच
अञ्जनो वामनश्चैव महापद्मश्च सुप्रभः |
५१ क
उद्योग पर्व
अध्याय ५८
सञ्जय़ उवाच
अञ्जलिं मूर्ध्नि सन्धाय़ तौ सन्देशमचोदय़म् ||
१३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १३८
भीष्म उवाच
अञ्जलिं शपथं सान्त्वं प्रणम्य शिरसा वदेत् |
१७ क
कर्ण पर्व
अध्याय १७
सञ्जय़ उवाच
अञ्जोगतिभिराय़म्य प्रय़त्नाद्धनुरुत्तमम् |
२५ क
कर्ण पर्व
अध्याय ३०
सञ्जय़ उवाच
अटता तु सदा देशान्नानाधर्मसमाकुलान् |
५२ क
शान्ति पर्व
अध्याय १३९
भीष्म उवाच
अटन्भैक्षं न विन्दामि यदा युष्माकमालय़े |
४९ क
आदि पर्व
अध्याय १३
सूत उवाच
अटमानः कदाचित्स स्वान्ददर्श पितामहान् |
११ क
वन पर्व
अध्याय ५७
वृहदश्व उवाच
अटमानस्ततोऽय़ोध्यां जगाम नगरीं तदा ||
२२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ९४
भीष्म उवाच
अटमानोऽथ तान्मार्गे पचमानान्महीपतिः |
१२ क
वन पर्व
अध्याय ५१
वृहदश्व उवाच
अटमानौ महात्मानाविन्द्रलोकमितो गतौ ||
११ ख