द्रोण पर्व
अध्याय
११७
सञ्जय़ उवाच
असत्यो विक्रमः पार्थ यत्र भूरिश्रवा रणे |
५६ क
वन पर्व
अध्याय
१७६
वैशम्पाय़न उवाच
असत्यो विक्रमो नॄणामिति मे निश्चिता मतिः |
७ क
आदि पर्व
अध्याय
१
सूत उवाच
असत्सत्सदसच्चैव यस्माद्देवात्प्रवर्तते |
१९५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१८४
भृगुरु उवाच
असत्सु दीय़ते यत्तु तद्दानमिह भुज्यते |
४ क
विराट पर्व
अध्याय
२७
वैशम्पाय़न उवाच
असत्सु दुर्लभां नित्यं सतां चाभिमतां सदा |
३ ख
वन पर्व
अध्याय
२२२
वैशम्पाय़न उवाच
असत्स्त्रीणां समाचारं नाहं कुर्यां न कामय़े ||
५७ ख
वन पर्व
अध्याय
२२२
वैशम्पाय़न उवाच
असत्स्त्रीणां समाचारं सत्ये मामनुपृच्छसि |
९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२५
भीष्म उवाच
असत्स्वभिनिविष्टेषु व्रुवतो मुक्तसंशय़म् |
१९ क
उद्योग पर्व
अध्याय
६०
वैशम्पाय़न उवाच
असदाचरितं ह्येतद्यदात्मानं प्रशंसति ||
२४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
४५
भीष्म उवाच
असदाचरिते मार्गे कथं स्यादनुकीर्तनम् |
८ क
वन पर्व
अध्याय
२२२
वैशम्पाय़न उवाच
असदाचरिते मार्गे कथं स्यादनुकीर्तनम् ||
९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
३९
श्रीभगवानु उवाच
असदित्युच्यते पार्थ न च तत्प्रेत्य नो इह ||
२८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
४५
भीष्म उवाच
असदेव हि धर्मस्य प्रमादो धर्म आसुरः |
९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
३८
पञ्चचूडो उवाच
असद्धर्मस्त्वय़ं स्त्रीणामस्माकं भवति प्रभो |
१४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
५७
भीष्म उवाच
असद्भ्यस्तु समादद्यात्सद्भ्यः सम्प्रतिपादय़ेत् ||
२१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२४
भीष्म उवाच
असद्वा हसितं किञ्चिदहितं वापि कर्मणा |
१२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
६८
भीष्म उवाच
असद्वृत्ताय़ पापाय़ लुव्धाय़ानृतवादिने |
१४ क
आदि पर्व
अध्याय
४२
सूत उवाच
असनामेति वै मत्वा भरणे चाविचारिते |
१९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१०३
भीष्म उवाच
असन्तप्तं तु यद्दारु प्रत्येति प्रकृतिं पुनः ||
३१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
७६
सञ्जय़ उवाच
असन्तस्तु न्यवर्तन्त वेदेभ्य इव नास्तिकाः |
४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१७३
भीष्म उवाच
असन्तुष्टः स्वय़ा योन्या माय़ां पश्यस्व यादृशीम् ||
३६ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
२
विदुर उवाच
असन्तुष्टाः प्रमुह्यन्ति सन्तोषं यान्ति पण्डिताः ||
२० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२५२
युधिष्ठिर उवाच
असन्तो हि वृथाचारं भजन्ते वहवोऽपरे ||
१५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१८६
भीष्म उवाच
असन्तो ह्यभिविख्याताः सन्तश्चाचारलक्षणाः ||
२ ख
वन पर्व
अध्याय
२४७
देवदूत उवाच
असन्तोषः परीतापो दृष्ट्वा दीप्ततराः श्रिय़ः |
३० क
शान्ति पर्व
अध्याय
१७
युधिष्ठिर उवाच
असन्तोषः प्रमादश्च मदो रागोऽप्रशान्तता |
१ क
सभा पर्व
अध्याय
५०
दुर्योधन उवाच
असन्तोषः श्रिय़ो मूलं तस्मात्तं कामय़ाम्यहम् |
१८ क
वन पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
असन्तोषपरा मूढाः सन्तोषं यान्ति पण्डिताः |
४४ क
वन पर्व
अध्याय
२०६
व्याध उवाच
असन्तोषपरा मूढाः सन्तोषं यान्ति पण्डिताः |
२० क
वन पर्व
अध्याय
२०६
व्याध उवाच
असन्तोषस्य नास्त्यन्तस्तुष्टिस्तु परमं सुखम् |
२० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२८४
पराशर उवाच
असन्तोषोऽसुखाय़ैव लोभादिन्द्रिय़विभ्रमः |
२५ क
उद्योग पर्व
अध्याय
३४
विदुर उवाच
असन्तोऽभ्यर्थिताः सद्भिः किञ्चित्कार्यं कदाचन |
४३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
९४
वामदेव उवाच
असन्त्यक्तमनुष्यं च तं जनाः कुर्वते प्रिय़म् ||
२७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१३०
युधिष्ठिर उवाच
असन्त्यजन्पुत्रपौत्राननुक्रोशात्पितामह ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२७६
नारद उवाच
असन्त्यागश्च भृत्यानां श्रेय़ एतदसंशय़म् ||
१८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
७४
कश्यप उवाच
असन्त्यागात्पापकृतामपापां; स्तुल्यो दण्डः स्पृशते मिश्रभावात् |
२३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
३४
विदुर उवाच
असन्त्यागात्पापकृतामपापां; स्तुल्यो दण्डः स्पृशते मिश्रभावात् |
६७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३५३
भीष्म उवाच
असन्नधीरनाकाङ्क्षी धर्मार्थकरणे नृप ||
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३५१
सूर्य उवाच
असन्नधीरनाकाङ्क्षी नित्यमुञ्छशिलाशनः |
४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२७६
नारद उवाच
असन्नुच्चैरपि प्रोक्तः शव्दः समुपशाम्यति |
३१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१७
उपमन्युरु उवाच
असपत्नः प्रसादश्च प्रत्ययो गिरिसाधनः ||
८६ ख
वन पर्व
अध्याय
२४०
दानवा ऊचुः
असपत्ना त्वय़ा हीय़ं भोक्तव्या वसुधा नृप |
२३ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
१५
वैशम्पाय़न उवाच
असपत्नां महीं भुङ्क्ते धर्मराजो युधिष्ठिरः |
१३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
४४
भीष्म उवाच
असपिण्डा च या मातुरसगोत्रा च या पितुः |
१७ क
वन पर्व
अध्याय
१०६
लोमश उवाच
असमञ्जा इति ख्यातः सगरस्य सुतो ह्यभूत् |
१० क
वन पर्व
अध्याय
१०६
लोमश उवाच
असमञ्जाः पुरादद्य सुतो मे विप्रवास्यताम् |
१४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
५७
भीष्म उवाच
असमञ्जाः सरय़्वां प्राक्पौराणां वालकान्नृप |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
५७
भीष्म उवाच
असमञ्जाः सुतो ज्येष्ठस्त्यक्तः पौरहितैषिणा ||
८ ख
वन पर्व
अध्याय
१०६
लोमश उवाच
असमञ्जोभय़ाद्घोरात्ततो नस्त्रातुमर्हसि ||
१२ ख
वन पर्व
अध्याय
१२३
लोमश उवाच
असमर्थं परित्राणे पोषणे च शुचिस्मिते |
९ क