chevron_left  अवुधानांarrow_drop_down
वन पर्व
अध्याय २
शौनक उवाच
अवुधानां गतिस्त्वेषा वुधानामपि मे शृणु |
६९ क
शान्ति पर्व
अध्याय १९९
मनुरु उवाच
अवुधास्तं न पश्यन्ति ह्यात्मस्था गुणवुद्धय़ः ||
९ ख
वन पर्व
अध्याय ६०
वृहदश्व उवाच
अवुध्यत वरारोहा सन्त्रस्ता विजने वने ||
१ ख
शल्य पर्व
अध्याय ५७
वासुदेव उवाच
अवुध्यद्भीमसेनस्तद्राज्ञस्तस्य चिकीर्षितम् |
४२ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय ८
सञ्जय़ उवाच
अवुध्यन्त महाराज स्त्रिय़ो ये चास्य रक्षिणः ||
२२ ख
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय २
वैशम्पाय़न उवाच
अवुध्यमानस्ता वाचो धर्मपुत्रो युधिष्ठिरः |
३९ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३०६
याज्ञवल्क्य उवाच
अवुध्यमानां प्रकृतिं वुध्यते पञ्चविंशकः |
६८ क
आदि पर्व
अध्याय ४६
मन्त्रिण ऊचुः
अवुध्यमानौ तं तत्र वृक्षस्थं पन्नगद्विजौ ||
२९ ग
द्रोण पर्व
अध्याय १६७
अर्जुन उवाच
अवृणीत सदा पुत्रान्मामेवाभ्यधिकं गुरुः ||
४५ ख
सभा पर्व
अध्याय ७२
धृतराष्ट्र उवाच
अवृणोत्तत्र पाञ्चाली पाण्डवानमितौजसः |
२६ क
उद्योग पर्व
अध्याय ३९
विदुर उवाच
अवृत्तिं विनय़ो हन्ति हन्त्यनर्थं पराक्रमः |
३२ क
शान्ति पर्व
अध्याय २७७
भीष्म उवाच
अवृत्तिकर्शितं चैव यः पश्यति स मुच्यते ||
३१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ३४
विदुर उवाच
अवृत्तिर्भय़मन्त्यानां मध्यानां मरणाद्भय़म् |
५० क
अनुशासन पर्व
अध्याय १२५
भीष्म उवाच
अवृत्त्या क्लिश्यमानोऽपि वृत्त्युपाय़ान्विगर्हय़न् |
१३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १४७
भीष्म उवाच
अवृत्त्या ये च भिन्दन्ति श्रुतत्यागपराय़णाः |
१२ क
शान्ति पर्व
अध्याय ७७
भीष्म उवाच
अवृत्त्या यो भवेत्स्तेनो वेदवित्स्नातकस्तथा |
१३ क
शान्ति पर्व
अध्याय १२८
भीष्म उवाच
अवृत्त्यान्त्यमनुष्योऽपि यो वै वेद शिवेर्वचः ||
३४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १३२
विदुरो उवाच
अवृत्त्यास्मान्प्रजहतो दृष्ट्वा किं जीवितेन ते ||
१७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १३१
कुन्त्यु उवाच
अवृत्त्यैव विपत्स्यामो वय़ं राष्ट्रात्प्रवासिताः |
२६ क
शान्ति पर्व
अध्याय ९१
उतथ्य उवाच
अवृष्टिरतिवृष्टिश्च व्याधिश्चाविशति प्रजाः ||
३४ ख
आदि पर्व
अध्याय ११०
वैशम्पाय़न उवाच
अवेक्षमाणः कुन्तीं च माद्रीं च समभाषत ||
२२ ख
वन पर्व
अध्याय १५५
वैशम्पाय़न उवाच
अवेक्षमाणः कैलासं मैनाकं चैव पर्वतम् |
१४ क
कर्ण पर्व
अध्याय २८
सञ्जय़ उवाच
अवेक्षमाणस्तं काकं नाशक्नोद्व्यपसर्पितुम् |
४३ ख
आदि पर्व
अध्याय १४०
वैशम्पाय़न उवाच
अवेक्षमाणस्तस्याश्च हिडिम्वो मानुषं वपुः |
१३ क
शान्ति पर्व
अध्याय १७०
भीष्म उवाच
अवेक्षमाणस्त्रीँल्लोकान्न तुल्यमुपलक्षय़े ||
९ ख
स्त्री पर्व
अध्याय २०
गान्धार्यु उवाच
अवेक्षमाणा तं वाला कृष्ण त्वामभिभाषते |
९ क
कर्ण पर्व
अध्याय ६७
सञ्जय़ उवाच
अवेक्षमाणा मुहुरर्जुनस्य; ध्वजं महान्तं वपुषा ज्वलन्तम् ||
३६ ख
स्त्री पर्व
अध्याय १०
वैशम्पाय़न उवाच
अवेक्षमाणा राजानं धृतराष्ट्रं मनीषिणम् |
१९ क
वन पर्व
अध्याय १११
लोमश उवाच
अवेक्षमाणा शनकैर्जगाम; कृत्वाग्निहोत्रस्य तदापदेशम् ||
१७ ख
विराट पर्व
अध्याय १५
वैशम्पाय़न उवाच
अवेक्षमाणा सुश्रोणी पतींस्तान्दीनचेतसः ||
१३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १४८
सञ्जय़ उवाच
अवेक्षमाणास्तेऽन्योन्यं सुसंमूढा विचेतसः |
१८ क
कर्ण पर्व
अध्याय १४
सञ्जय़ उवाच
अवेक्षमाणो गोविन्दः सव्यसाचिनमव्रवीत् ||
२६ ख
वन पर्व
अध्याय २२
वासुदेव उवाच
अवेक्षमाणो यन्तारमपश्यं शरपीडितम् ||
६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १०
भीम उवाच
अवेक्षस्व यथा स्वैः स्वैः कर्मभिर्व्यापृतं जगत् |
२८ क
शान्ति पर्व
अध्याय ८
वैशम्पाय़न उवाच
अवेक्षस्व यथान्याय़ं पश्य देवासुरं यथा |
२५ क
द्रोण पर्व
अध्याय ६
सञ्जय़ उवाच
अवेक्षेतां तदान्योन्यं समरे कर्णपाण्डवौ ||
२२ ख
विराट पर्व
अध्याय ३६
वैशम्पाय़न उवाच
अवेक्षेताममित्रघ्नौ कुरूणां वलिनां वलम् |
४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय २९
वासुदेव उवाच
अवेक्षेरन्धार्तराष्ट्राः समक्षं; मां च प्राप्तं कुरवः पूजय़ेय़ुः ||
४२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ९१
भगवानु उवाच
अवेक्षेरन्धार्तराष्ट्राः समर्थां; मां च प्राप्तं कुरवः पूजय़ेय़ुः ||
२० ख
स्त्री पर्व
अध्याय २५
गान्धार्यु उवाच
अवेक्ष्य कृपणं भार्या विलपत्यतिदुःखिता ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १८७
भीष्म उवाच
अवेक्ष्य च शनैर्वुद्ध्या लभते शं परं ततः ||
५४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २३२
व्यास उवाच
अवेक्ष्य चेय़ात्परमेष्ठिसात्म्यतां; प्रय़ान्ति यां भूतगतिं मनीषिणः ||
३४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २८४
पराशर उवाच
अवेक्ष्य मनसा शास्त्रं वुद्ध्या च नृपसत्तम ||
२४ ख
वन पर्व
अध्याय २५०
वैशम्पाय़न उवाच
अवेक्ष्य मन्दं प्रविमुच्य शाखां; सङ्गृह्णती कौशिकमुत्तरीय़म् ||
१ ख
शल्य पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
अवेक्ष्य सञ्जय़ो दीनो रोदमानं भृशातुरम् ||
५१ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९३
स्नुषो उवाच
अवेक्ष्या इति कृत्वा त्वं दृढभक्त्येति वा द्विज |
५२ क
वन पर्व
अध्याय २७१
मार्कण्डेय़ उवाच
अवेक्ष्याभ्यद्रवद्वीरः सौमित्रिर्मित्रनन्दनः ||
१० ख
वन पर्व
अध्याय २९९
वैशम्पाय़न उवाच
अवेक्षय़ा महाराज तव गाण्डीवधन्वना |
२२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय २४
भीष्म उवाच
अवेदव्रतचारित्रास्त्रिभिर्वर्णैर्युधिष्ठिर |
४७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ५८
भीष्म उवाच
अवेदानामकीर्तीनामलोकानामय़ज्वनाम् |
३१ क