शान्ति पर्व
अध्याय
२५१
भीष्म उवाच
अभीतः शुचिरभ्येति राजद्वारमशङ्कितः |
९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
५०
भीष्म उवाच
अभीतरूपाः संहृष्टास्तेऽन्योन्यवशवर्तिनः |
१७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१३६
भीष्म उवाच
अभीतस्य तु विस्रम्भात्सुमहज्जाय़ते भय़म् ||
२०१ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
१०
वैशम्पाय़न उवाच
अभीता युध्यमानास्ते घ्नन्तः शत्रुगणान्वहून् |
६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१२०
सञ्जय़ उवाच
अभीताः पर्यवर्तन्त व्यादितास्यमिवान्तकम् ||
४२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
अभीताः समरे शत्रूनभ्यधावन्त दंशिताः ||
१६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
७३
सञ्जय़ उवाच
अभीताः समवर्तन्त शस्त्रवृष्ट्या समन्ततः ||
३५ ख
शल्य पर्व
अध्याय
९
सञ्जय़ उवाच
अभीतानां तथा राजन्यमराष्ट्रविवर्धनम् ||
५८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१००
भीष्म उवाच
अभीतानामिमे लोका भास्वन्तो हन्त पश्यत |
४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
९८
भीष्म उवाच
अभीतो विकिरञ्शत्रून्प्रतिगृह्णञ्शरांस्तथा |
११ क
आदि पर्व
अध्याय
२१८
वैशम्पाय़न उवाच
अभीतौ युधि दुर्धर्षौ तस्थतुः सज्जकार्मुकौ ||
३९ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
५
विदुर उवाच
अभीप्सति च तां नित्यमतृप्तः स पुनः पुनः |
१८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३१
सृञ्जय़ उवाच
अभीप्सामि सुतं वीरं वीर्यवन्तं दृढव्रतम् |
१५ क
वन पर्व
अध्याय
२१०
मार्कण्डेय़ उवाच
अभीममतिभीमं च भीमं भीमवलावलम् |
११ क
कर्ण पर्व
अध्याय
६४
सञ्जय़ उवाच
अभीरुजुष्टं हतदेहसङ्कुलं; रणाजिरं लोहितरक्तमावभौ ||
४ ख
आदि पर्व
अध्याय
६१
वैशम्पाय़न उवाच
अभीरुरिति विख्यातः क्षितौ राजर्षिसत्तमः ||
५१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
४७
सञ्जय़ उवाच
अभीशवो हय़ाश्चैव तथोभौ पार्ष्णिसारथी ||
२८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
७८
सञ्जय़ उवाच
अभीशुहस्तं कृष्णं च दृष्ट्वादित्यमिवापरम् |
११ क
कर्ण पर्व
अध्याय
५४
विशोक उवाच
अभीशुहस्तस्य जनार्दनस्य; विगाहमानस्य चमूं परेषाम् ||
२७ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२३
सञ्जय़ उवाच
अभीशुहस्तो दाशार्हस्तथोक्तः सव्यसाचिना |
४९ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२४
व्रह्मो उवाच
अभीशून्हि त्रिलोकेशः सङ्गृह्य प्रपितामहः |
१११ ख
आदि पर्व
अध्याय
२१३
वैशम्पाय़न उवाच
अभीश्च मन्युमांश्चैव ततस्तमरिमर्दनम् |
६० क
कर्ण पर्व
अध्याय
४
सञ्जय़ उवाच
अभीषाहाः कवचिनः प्रहरन्तो मदोत्कटाः |
३७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१२५
दुर्योधन उवाच
अभीषाहाः शूरसेनाः शिवय़ोऽथ वसातय़ः ||
३१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
६६
सञ्जय़ उवाच
अभीषाहाः शूरसेनाः शिवय़ोऽथ वसातय़ः ||
३७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
६८
सञ्जय़ उवाच
अभीषाहाः शूरसेनाः शिवय़ोऽथ वसातय़ः |
२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१८
सञ्जय़ उवाच
अभीषाहाः शूरसेनाः शिवय़ोऽथ वसातय़ः ||
१२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०२
सञ्जय़ उवाच
अभीषाहाः शूरसेनाः शिवय़ोऽथ वसातय़ः |
७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११२
सञ्जय़ उवाच
अभीषाहाः शूरसेनाः शिवय़ोऽथ वसातय़ः ||
१०९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
अभीषाहाः शूरसेनाः शिवय़ोऽथ वसातय़ः ||
७६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३६
सञ्जय़ उवाच
अभीषाहाञ्शूरसेनान्क्षत्रिय़ान्युद्धदुर्मदान् |
४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३२
सञ्जय़ उवाच
अभीषाहाञ्शूरसेनान्वाह्लीकान्सवसातिकान् |
२४ क
वन पर्व
अध्याय
२२
वासुदेव उवाच
अभीषुहस्तं तं दृष्ट्वा सीदन्तं सारथिं रणे |
९ क
सभा पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
अभीषून्सम्प्रजग्राह स्वय़ं कुरुपतिस्तदा ||
१४ ग
भीष्म पर्व
अध्याय
१०
सञ्जय़ उवाच
अभीसारा कुलूताश्च शैवला वाह्लिकास्तथा ||
५२ ख
वन पर्व
अध्याय
१४
वासुदेव उवाच
अभुक्तनाशश्चार्थानां वाक्पारुष्यं च केवलम् ||
९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४२
व्रह्मो उवाच
अभुक्तवत्सु नाश्नन्ति दिवा चैव न शेरते ||
१२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
९३
भीष्म उवाच
अभुक्तवत्सु नाश्नाति व्राह्मणेषु तु यो नरः |
१४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२१४
भीष्म उवाच
अभुक्तवत्सु नाश्नानः सततं यस्तु वै द्विजः |
१३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
३२
नारद उवाच
अभुक्त्वा देवकार्याणि कुर्वते येऽविकत्थनाः |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
७
वैशम्पाय़न उवाच
अभुक्त्वा पार्थिवान्भोगानृणान्यनवदाय़ च |
१७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
६५
भीष्म उवाच
अभुक्त्वातिथय़े चान्नं प्रय़च्छेद्यः समाहितः |
६१ क
सभा पर्व
अध्याय
४८
दुर्योधन उवाच
अभुञ्जाना याज्ञसेनी प्रत्यवैक्षद्विशां पते ||
४१ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
८
वैशम्पाय़न उवाच
अभूच्च तूष्णीं राजासौ ध्याय़मानो महीपते ||
१० ग
उद्योग पर्व
अध्याय
७३
वैशम्पाय़न उवाच
अभूतपूर्वं भीमस्य मार्दवोपगतं वचः ||
१ ख
आदि पर्व
अध्याय
२६
सूत उवाच
अभूतपूर्वं सङ्ग्रामे तदा देवासुरेऽपि च |
३० क
द्रोण पर्व
अध्याय
१७२
सञ्जय़ उवाच
अभूतपूर्वो वीभत्सोर्दुःखान्मन्युरजाय़त ||
११ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
११
सञ्जय़ उवाच
अभूतां तावदृश्यौ च शरजालैः समन्ततः |
१५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
८३
मुनिरु उवाच
अभूतिकामा भूतानां तादृशैर्मेऽभिसंहितम् ||
३४ ख
आदि पर्व
अध्याय
६९
वैशम्पाय़न उवाच
अभूतिरेषा कस्त्यज्याज्जीवञ्जीवन्तमात्मजम् |
३२ क