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शान्ति पर्व
अध्याय १३८
भीष्म उवाच
अनुद्विग्नः काकशङ्की भुजङ्गचरितं चरेत् ||
६२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ३९
श्रीभगवानु उवाच
अनुद्वेगकरं वाक्यं सत्यं प्रिय़हितं च यत् |
१५ क
स्त्री पर्व
अध्याय २
विदुर उवाच
अनुधावति धावन्तं कर्म पूर्वकृतं नरम् ||
२२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३३७
श्रीभगवानु उवाच
अनुध्यानान्मम मुने नैतद्वचनमन्यथा ||
५१ ख
वन पर्व
अध्याय २
व्राह्मणा ऊचुः
अनुध्यानेन जप्येन विधास्यामः शिवं तव |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३२३
भीष्म उवाच
अनुनीतः सदस्यैश्च वृहस्पतिरुदारधीः |
५४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ३
सात्यकिरु उवाच
अनुनीता हि भीष्मेण द्रोणेन च महात्मना |
१२ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय १९
वैशम्पाय़न उवाच
अनुनीतो महावाहुः सौहृदे स्थापितोऽपि च ||
६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४९
सञ्जय़ उवाच
अनुनीतोऽस्मि गोविन्द तारितश्चाद्य माधव |
११४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २२६
व्यास उवाच
अनुनीय़ तथा काव्यः सत्यसन्धो महाव्रतः |
१६ क
उद्योग पर्व
अध्याय ९१
भगवानु उवाच
अनुनीय़ यथाशक्ति तं नृशंसं विदुर्वुधाः ||
१० ख
वन पर्व
अध्याय २१२
मार्कण्डेय़ उवाच
अनुनीय़मानोऽपि भृशं देववाक्याद्धि तेन सः |
११ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १२५
भीष्म उवाच
अनुनेतुं न शक्नोषि तेनासि हरिणः कृशः ||
२३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १२२
वैशम्पाय़न उवाच
अनुनेतुं महावाहो यतस्व पुरुषोत्तम |
४ क
वन पर्व
अध्याय २९१
वैशम्पाय़न उवाच
अनुनेतुं सहस्रांशुं न शशाक मनस्विनी ||
१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय २०
वैशम्पाय़न उवाच
अनुनेतुमिहार्हन्ति धृतराष्ट्रं सुहृज्जनाः ||
१३ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ६
वैशम्पाय़न उवाच
अनुनेतुमिहेच्छामि भवद्भिः पृथिवीपतिम् ||
१९ ख
आदि पर्व
अध्याय १५८
गन्धर्व उवाच
अनुनेष्याम्यहं विद्यां स्वय़ं तुभ्यं व्रते कृते ||
४३ ख
वन पर्व
अध्याय २८४
वैशम्पाय़न उवाच
अनुनेय़ः परं शक्त्या श्रेय़ एतद्धि ते परम् ||
१५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ६१
धृतराष्ट्र उवाच
अनुनेय़ानि जल्पन्तमनय़ान्नान्वपद्यत ||
२४ ख
आदि पर्व
अध्याय २९
सूत उवाच
अनुपत्य खगं त्विन्द्रो वज्रेणाङ्गेऽभ्यताडय़त् |
१७ क
आदि पर्व
अध्याय २६
सूत उवाच
अनुपमवलवीर्यतेजसो; धृतमनसः परिरक्षणेऽमृतस्य |
४६ क
उद्योग पर्व
अध्याय १२३
वैशम्पाय़न उवाच
अनुपश्यस्व तत्तात मा मन्युवशमन्वगाः ||
२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ६
भीष्म उवाच
अनुपहतमदीनं कामकारेण दैवं; नय़ति पुरुषकारः सञ्चितस्तत्र तत्र ||
४७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ७
सञ्जय़ उवाच
अनुपादस्तु यो वामस्तत्र शल्यो व्यवस्थितः |
१९ क
उद्योग पर्व
अध्याय ९०
वैशम्पाय़न उवाच
अनुपासितवृद्धत्वाच्छ्रिय़ा मोहाच्च दर्पितः |
१७ क
उद्योग पर्व
अध्याय ३४
विदुर उवाच
अनुपाय़प्रय़ुक्तानि मा स्म तेषु मनः कृथाः ||
६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ८९
भीष्म उवाच
अनुपाय़ेन दमय़न्प्रकोपय़ति वाजिनः ||
१२ ख
वन पर्व
अध्याय ८०
पुलस्त्य उवाच
अनुपोष्य त्रिरात्राणि तीर्थान्यनभिगम्य च |
३९ क
शान्ति पर्व
अध्याय २७०
भीष्म उवाच
अनुप्रविश्य तद्वर्णो दृश्यते रञ्जय़न्दिशः ||
९ ख
वन पर्व
अध्याय १६९
अर्जुन उवाच
अनुप्रविश्य तान्वाणाः प्राहिण्वन्यमसादनम् ||
१७ ख
आदि पर्व
अध्याय २०५
वैशम्पाय़न उवाच
अनुप्रविश्य राजानमापृच्छ्य च विशां पते ||
१८ ख
वन पर्व
अध्याय २१८
मार्कण्डेय़ उवाच
अनुप्रविश्य रुद्रेण वह्निं जातो ह्ययं शिशुः |
२९ क
आदि पर्व
अध्याय २०५
वैशम्पाय़न उवाच
अनुप्रवेशे यद्वीर कृतवांस्त्वं ममाप्रिय़म् |
२६ ख
आदि पर्व
अध्याय २०५
वैशम्पाय़न उवाच
अनुप्रवेशे राज्ञस्तु वनवासो भवेन्मम |
१७ क
वन पर्व
अध्याय २२२
वैशम्पाय़न उवाच
अनुप्रश्नः संशय़ो वा नैतत्त्वय़्युपपद्यते |
१० क
अनुशासन पर्व
अध्याय ४५
भीष्म उवाच
अनुप्रश्नः संशय़ो वा सतामेतदुपालभेत् ||
८ ख
सभा पर्व
अध्याय ५७
विदुर उवाच
अनुप्रिय़ं चेदनुकाङ्क्षसे त्वं; सर्वेषु कार्येषु हिताहितेषु |
१६ क
शान्ति पर्व
अध्याय १०३
भीष्म उवाच
अनुप्लवन्ते मेघाश्च तथादित्यस्य रश्मय़ः ||
६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ४
व्यास उवाच
अनुप्लवन्ते मेघाश्च तथैवेन्द्रधनूंषि च ||
२४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ९६
नारद उवाच
अनुभावप्रय़ुक्तानि सुरैरवजितानि ह ||
१६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ५७
वैशम्पाय़न उवाच
अनुभाष्य महाराज पुनः पप्रच्छ सञ्जय़म् ||
२९ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९२
वैशम्पाय़न उवाच
अनुभूतं च दृष्टं च यन्मय़ाद्भुतमुत्तमम् |
२१ क
उद्योग पर्व
अध्याय ८
शल्य उवाच
अनुभूतं महद्दुःखं देवराजेन भारत ||
३७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १२६
वासुदेव उवाच
अनुभूतं मुनिगणैस्तीर्थय़ात्रापराय़णैः ||
४८ ख
वन पर्व
अध्याय १८६
वैशम्पाय़न उवाच
अनुभूतं हि वहुशस्त्वय़ैकेन द्विजोत्तम |
१२ क
भीष्म पर्व
अध्याय १६
सञ्जय़ उवाच
अनुभूतः सहामात्यैः क्षान्तं च सुचिरं वने ||
४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १५६
सञ्जय़ उवाच
अनुभूताः सहामात्यैर्निकृतैरधिदेवने ||
११ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ८१
वैशम्पाय़न उवाच
अनुभूतान्यदुःखार्हा तां स्म पृच्छेरनामय़म् ||
४० ख
शान्ति पर्व
अध्याय २५
वैशम्पाय़न उवाच
अनुभूय़ ततः पश्चात्प्रस्थातासि विशां पते ||
५ ख